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आजकल ज़्यादातर मिडिल क्लास प्रोफेशनल्स को कंपनी की तरफ से हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है। लेकिन क्या ये पॉलिसी अकेले आपकी या आपके परिवार की हेल्थ ज़रूरतों को कवर करने के लिए काफी है? जवाब है – नहीं। और इस “नहीं” के पीछे कई वजहें हैं जिन्हें जानना बेहद जरूरी है।
चलिए जानते हैं कि सिर्फ कंपनी पर डिपेंड करने से क्या-क्या रिस्क हो सकते हैं और क्या सॉल्यूशन है।
सबसे पहला और बड़ा प्रॉब्लम ये है कि जैसे ही आप नौकरी छोड़ते हैं, या कंपनी आपको निकालती है, आपका कंपनी वाला हेल्थ इंश्योरेंस उसी वक्त बंद हो जाता है।
अगर उस वक्त कोई हेल्थ इमरजेंसी आ जाए — तो?
इसलिए ज़रूरी है कि आप खुद का एक independent health insurance रखें जो आपकी नौकरी से जुड़ा ना हो।
अधिकतर कंपनियों की पॉलिसी सिर्फ 2 लाख या 5 लाख तक की होती है, जो आज के समय में बड़ी मेडिकल emergencies के लिए काफी नहीं है।
तो सोचिए अगर आपको या किसी family member को ऐसी कोई बीमारी हो जाए, और आपके पास सिर्फ 3 लाख का कवर हो — क्या करेंगे?
कई बार कंपनी सिर्फ employee को कवर करती है, spouse या parents को नहीं।
Family floater plan लेना बहुत ज़रूरी है जिससे पूरे परिवार को financial protection मिले।
COVID के दौरान ये देखने को मिला कि कई कंपनियों ने employees का sum insured कम कर दिया, या कुछ hospitals को पॉलिसी में से हटा दिया।
क्यों? क्योंकि वो corporate budget में कटौती कर रहे थे।
अब सोचिए, अगर आपकी company एक दिन decide करे कि वो हेल्थ बेनिफिट्स हटाएगी या घटाएगी — तब?
आपके पास खुद का बैकअप होना ज़रूरी है।
Corporate policies में अक्सर pre-existing conditions का क्लियर डिस्क्लोज़र नहीं होता, या फिर उनका कवर बहुत delay से मिलता है।
अपनी खुद की policy में आप transparent तरीके से सब disclose कर सकते हैं और सही समय पर claim पा सकते हैं।
कंपनी की policy में आप सिर्फ उसी TPA या hospital network में जा सकते हैं जो उन्होंने fix किया है।
तो आपको reimbursement का चक्कर झेलना पड़ेगा जो बेहद time-consuming होता है।
ये पॉलिसी है तो अच्छा है, पर इसी पर भरोसा मत रखिए। इसे top-up या add-on benefit की तरह देखिए।
कम से कम ₹10 लाख का floater प्लान लीजिए जिसमें आपका पूरा परिवार कवर हो।
अगर आपका बजट कम है तो basic ₹5 लाख के साथ ₹20 लाख का super top-up ले सकते हैं। Premium बहुत कम होता है।
जैसे आप EMI में car या phone खरीदते हैं, वैसे ही हर महीने थोड़ा premium देना future की security है।
मान लीजिए आप हर साल ₹10,000 का premium दे रहे हैं और उसी साल किसी फैमिली मेंबर का इलाज ₹4 लाख में होता है।
आपने सिर्फ ₹10K खर्च किए और 4 लाख का benefit मिला।
पर अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया और वो इलाज हुआ – तो सीधे जेब से 4 लाख गए। यही फर्क है planning और panic में।
| उम्र | Sum Insured | सालाना Premium |
| 30 साल | ₹10 लाख (Individual) | ₹6,000 – ₹10,000 |
| 35 साल | ₹10 लाख (Floater – 2 Adults + 1 Kid) | ₹12,000 – ₹18,000 |
| 40+ | ₹10 लाख | ₹15,000+ |
Premium company, coverage और age के हिसाब से vary करता है, लेकिन peace of mind priceless होती है।